PM Awas Yojana Gramin List 2026: दोस्तों, गाँवों में इन दिनों सबसे ज़्यादा चर्चा इसी की है कि “आवास की लिस्ट में नाम आया या नहीं।” पर लिस्ट देखने से पहले दो बातें समझ लीजिए, क्योंकि कई वेबसाइटें इन्हें गड़बड़ बताती हैं।
पहली, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (PMAY-G) अब मार्च 2029 तक बढ़ा दी गई है, और 2024-25 से 2028-29 के बीच 2 करोड़ और घर बनाने का लक्ष्य है। यानी “लक्ष्य 2027 तक” वाली बात पुरानी है। दूसरी, लिस्ट में नाम होने का मतलब ये नहीं कि पैसा तुरंत खाते में आ जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब मकान स्वीकृति के लिए Awaas+ 2024 सर्वे वाली सूची मायने रखती है।
लिस्ट में नाम कैसे देखें?
ग्रामीण लाभार्थी सूची आधिकारिक PMAY-G पोर्टल (pmayg.dord.gov.in, कुछ पन्नों पर pmayg.nic.in भी दिखता है) पर देखी जा सकती है। सबसे आसान रास्ता ये है:
- आधिकारिक पोर्टल खोलिए।
- ऊपर के मेन्यू में Awaassoft पर क्लिक कीजिए।
- Reports में जाइए और लाभार्थी की जानकारी/सत्यापन वाली रिपोर्ट चुनिए (मेन्यू के नाम बदल सकते हैं)।
- अपना राज्य, ज़िला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत चुनिए।
- कैप्चा भरकर सबमिट कीजिए और सूची खोलिए।
दूसरा तरीका: अगर आपके पास रजिस्ट्रेशन नंबर है, तो पोर्टल के Stakeholders → IAY/PMAYG Beneficiary में सीधे उसी से स्टेटस देख सकते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार UMANG ऐप से भी ये हो सकता है।
सूची में आम तौर पर गाँव का नाम, रजिस्ट्रेशन नंबर, लाभार्थी का नाम, माता/पिता का नाम, स्वीकृति संख्या, मंज़ूर राशि, किस्त और मकान की स्थिति दिखती है। सूची ग्राम पंचायत के हिसाब से होती है, तो अपनी ही पंचायत की सूची में पूरे गाँव के लाभार्थी देख सकते हैं।
कितनी मदद मिलती है?
- मैदानी इलाक़े: ₹1.20 लाख।
- पहाड़ी, पूर्वोत्तर राज्य, J&K, लद्दाख और कठिन/IAP क्षेत्र: ₹1.30 लाख।
- इसके साथ मनरेगा के तहत मज़दूरी के दिन और शौचालय के लिए अलग सहायता भी मिलती है।
पैसा लाभार्थी के आधार से जुड़े बैंक खाते में DBT से आता है, और निर्माण के चरणों के हिसाब से किस्तों में जारी होता है। किस्तें जियो-टैग फ़ोटो से सत्यापित होने के बाद ही आगे बढ़ती हैं।
एक सुधार: आपके दिए टेक्स्ट में ₹30,000 की अलग मज़दूरी और 25,000/40,000/40,000/15,000 की चार किस्तों का ज़िक्र है। मैं इन आँकड़ों को किसी सोर्स से पक्का नहीं कर पाया। मिलने वाले सोर्स “कम से कम तीन किस्तों” की बात करते हैं, इसलिए मैंने किस्तों की रकम नहीं लिखी। अपने केस में किस्त की रकम पोर्टल पर “मंज़ूर राशि” और “जारी राशि” वाले कॉलम में देख लीजिए।
किन्हें लाभ मिलता है?
योजना उन ग्रामीण परिवारों के लिए है जिनके पास पक्का मकान नहीं है, या जो कच्चे/जर्जर मकान में रहते हैं। चयन SECC और Awaas+ 2024 सर्वे के डेटा से होता है, ग्राम सभा के सत्यापन के बाद। आम तौर पर:
- आवेदक भारतीय नागरिक और ग्रामीण क्षेत्र का निवासी हो।
- परिवार के पास पक्का मकान न हो।
- पहले इस योजना (या IAY) का लाभ न मिला हो।
- आयकरदाता या सरकारी नौकरी वाले परिवार आमतौर पर बाहर रहते हैं।
सटीक बहिष्करण नियम अपनी ग्राम पंचायत या ब्लॉक के आवास अधिकारी से पूछ लीजिए।
Awaas+ 2024 सर्वे क्या है?
पुरानी SECC सूची में जो परिवार छूट गए थे, उन्हें जोड़ने के लिए Awaas+ 2024 सर्वे हुआ। रिपोर्ट्स के अनुसार 2024-29 के दौर में सिर्फ़ इसी सर्वे में पहचाने गए परिवार (और पुरानी स्थायी प्रतीक्षा सूची वालों) को ही मकान स्वीकृत हो सकता है। इसलिए अगर आपका नाम सूची में नहीं है, तो सबसे पहले ये देखिए कि आपका परिवार सर्वे में दर्ज है या नहीं।
लिस्ट में नाम नहीं आया तो क्या करें?
- अपना स्टेटस/रजिस्ट्रेशन नंबर पोर्टल पर चेक कीजिए।
- ग्राम पंचायत या ब्लॉक विकास कार्यालय जाकर पूछिए कि आपका परिवार Awaas+ 2024 सर्वे में दर्ज है या नहीं।
- अगर सर्वे में नहीं है, तो पूछिए कि दोबारा सर्वे या शिकायत की क्या प्रक्रिया है। पहले रिजेक्ट हुए परिवार भी इस सर्वे के बाद जुड़ सकते हैं।
- किसी भी एजेंट को “नाम जुड़वाने” के पैसे मत दीजिए। योजना में किस्त या स्वीकृति के लिए कोई फ़ीस नहीं लगती।
सामान्य ग़लतियाँ
- लिस्ट में नाम आते ही पैसा आ जाने की उम्मीद। पहले स्वीकृति, फिर निर्माण, फिर जियो-टैगिंग और सत्यापन, तब किस्त।
- आधार और बैंक खाते का लिंक न होना। DBT रुक सकता है।
- ग़लत पोर्टल पर जानकारी डालना। सिर्फ़ आधिकारिक पोर्टल इस्तेमाल करें।
- ग्रामीण और शहरी योजना को मिला देना। दोनों के नियम अलग हैं, नीचे देखिए।
ग्रामीण बनाम शहरी: फ़र्क
- PMAY-G (ग्रामीण): ग्रामीण विकास मंत्रालय। सीधे DBT से ₹1.20-1.30 लाख।
- PMAY-U 2.0 (शहरी): आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय। रिपोर्ट्स के अनुसार BLC और AHP में ₹2.50 लाख प्रति इकाई, या ब्याज सब्सिडी योजना में ₹1.80 लाख तक। आवेदन pmaymis.gov.in पर।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. PMAY-G कब तक चलेगी?
रिपोर्ट्स के अनुसार मार्च 2029 तक, 2 करोड़ अतिरिक्त घरों के लक्ष्य के साथ।
2. ग्रामीण परिवार को कितनी मदद मिलती है?
मैदानी इलाकों में ₹1.20 लाख, पहाड़ी/पूर्वोत्तर/कठिन क्षेत्रों में ₹1.30 लाख।
3. शहरी परिवार को कितनी मदद?
PMAY-U 2.0 में ₹2.50 लाख प्रति इकाई (कुछ घटकों में) या ब्याज सब्सिडी ₹1.80 लाख तक। ये ग्रामीण योजना से अलग है।
4. पैसा किसके खाते में आता है?
लाभार्थी के आधार से जुड़े बैंक खाते में, DBT से।
5. लिस्ट में नाम नहीं है, क्या मैं नया आवेदन कर सकता हूँ?
2024-29 के दौर में चयन सर्वे के आधार पर है। पंचायत/ब्लॉक कार्यालय से सर्वे की स्थिति पूछिए।
6. क्या किस्त निर्माण से पहले मिलती है?
रिपोर्ट्स के अनुसार किस्तें निर्माण के चरणों से जुड़ी हैं। पहली किस्त स्वीकृति के साथ मानी जाती है, आगे की जियो-टैग सत्यापन के बाद।
सीधी बात ये है कि PMAY-G चल रही है और 2029 तक बढ़ा दी गई है, पर इसमें नाम तभी आता है जब आपका परिवार सर्वे और सत्यापन में पात्र निकले। नाम चेक करना आसान है, पर असली काम सर्वे की स्थिति, आधार-बैंक लिंक और निर्माण की शर्तें पूरी करना है। अफ़वाहों पर नहीं, पोर्टल और अपनी ग्राम पंचायत की जानकारी पर चलिए।
सत्यापन के लिए इस्तेमाल किए गए सोर्स (7 अक्टूबर 2026 को देखे गए)
- Bajaj Finserv, ₹1.20/1.30 लाख, 2029 तक विस्तार, 2 करोड़ अतिरिक्त घर: bajajfinserv.in/pradhan-mantri-awas-yojana-gramin
- Bajaj Finserv, लिस्ट देखने का तरीका (Awaassoft, Stakeholders, UMANG): bajajfinserv.in/how-to-check-pmayg-beneficiary-list
- RTI Wiki, PMAY-G बनाम PMAY-U 2.0, कम से कम 3 किस्तें, ₹2.50 लाख: righttoinformation.wiki/pmay-2026-complete-guide
- RTI Wiki, Awaas+ 2024 सर्वे का असर: righttoinformation.wiki/pmay-beneficiary-list
- AmiEligible, पोर्टल pmayg.dord.gov.in: amieligible.in/blog/pmay-gramin-list-2026
- सरकारी योजना, लिस्ट में दिखने वाली जानकारी और स्टेप्स: sarkariyojana.com/pradhan-mantri-awas-yojana-gramin-list/
- आधिकारिक पोर्टल: pmayg.dord.gov.in / pmayg.nic.in
डिस्क्लेमर
इस लेख की जानकारी सामान्य जानकारी के लिए है। योजना के नियम, राशि, पात्रता और पोर्टल सरकार द्वारा बदले जा सकते हैं। लाभ और सूची में नाम की पुष्टि सिर्फ़ आधिकारिक पोर्टल और संबंधित ग्राम पंचायत/ब्लॉक कार्यालय से होती है। हम किसी लाभ या स्वीकृति की गारंटी नहीं देते।